GST Reforms: GST काउंसिल की 56वीं बैठक जल्द ही होने वाली है, और बाजार में इस बात की चर्चा ज़ोरों पर है कि सरकार GST के मौजूदा ढांचे में बड़े बदलाव करने वाली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी स्वतंत्रता दिवस के मौके पर इन सुधारों का ऐलान किया था, जिससे आम आदमी के लिए कई चीजों की कीमतें कम होने की उम्मीद है। लेकिन, सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इन बदलावों का असर सोने और चांदी पर भी पड़ेगा, और अगर हाँ, तो कैसे?
सोने पर GST घटेगा या बढ़ेगा, कारोबारियों में असमंजस
फिलहाल, सोने और चांदी पर 3% की दर से जीएसटी लगता है, जिसमें सोने की ज्वेलरी, सिक्के और बार सब शामिल हैं। इसके अलावा, ज्वेलरी बनवाने के मेकिंग चार्जेस पर 5% जीएसटी लगता है। अब, एक्सपर्ट्स का मानना है कि नए जीएसटी ढांचे में सोने पर लगने वाले 3% टैक्स को कम करके 0.5% से 1% तक किया जा सकता है। यह कदम सोने की कीमतों को कम करेगा, जिससे फेस्टिवल सीजन में सोने की मांग में ज़बरदस्त उछाल आ सकता है।
हालांकि, सोने के कारोबारियों में एक डर भी है। उन्हें इस बात की आशंका है कि कहीं सरकार इसे 5% तक न बढ़ा दे। अगर ऐसा होता है, तो आम आदमी के लिए सोना खरीदना और भी महंगा हो जाएगा, जिससे बाजार में मंदी आ सकती है। कूचा महाजनी के चांदी कारोबारी सुशील जैन कहते हैं कि इस वक्त बाजार में असमंजस की स्थिति है। कोई कह रहा है टैक्स बढ़ेगा, तो कोई कह रहा है कि स्थिर रहेगा। उनकी राय में अगर जीएसटी बढ़ा, तो कालाबाजारी बढ़ सकती है। लोग टैक्स से बचने के लिए बिना बिल के सोना खरीदेंगे, जिससे सरकार को राजस्व का नुकसान होगा।
आपकी जेब पर क्या असर होगा?
अगर सरकार सोने पर जीएसटी कम करती है, तो यह ग्राहकों के लिए एक बड़ी खुशखबरी होगी। मान लीजिए, आप ₹1,00,000 का सोना खरीद रहे हैं। मौजूदा 3% जीएसटी के हिसाब से आपको ₹3,000 टैक्स देना होता है। लेकिन, अगर जीएसटी घटकर 2% हो जाता है, तो आपको सिर्फ ₹2,000 टैक्स देना होगा, जिससे आपकी ₹1,000 की सीधी बचत होगी। छोटी बचत ही सही, लेकिन जब बात लाखों के गहने खरीदने की आती है, तो यह बचत काफी मायने रखती है। इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) की वाइस प्रेसिडेंट अक्षा कंबोज का कहना है कि सोने के गहने निवेश और खास मौकों के लिए खरीदे जाते हैं, इसलिए जीएसटी में थोड़ी सी भी कमी से ग्राहकों पर खर्च का बोझ कम होगा।
कालाबाजारी का डर
व्यापारियों का कहना है कि जीएसटी की दर बढ़ाना एक अच्छा फैसला नहीं होगा। बीते छह महीनों में सोने की कीमतें पहले ही काफी बढ़ी हैं, जिससे लोग परेशान हैं। ऐसे में अगर सरकार जीएसटी बढ़ा देती है, तो इसका सीधा असर ग्राहकों की खरीदने की क्षमता पर पड़ेगा। ग्राहक, खासकर छोटे शहरों और कस्बों में, बिना बिल के खरीदारी की तरफ मुड़ सकते हैं, जिससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े होंगे और सरकार के लिए टैक्स कलेक्शन का लक्ष्य हासिल करना मुश्किल हो जाएगा। इसीलिए, कारोबारी और आम जनता, दोनों ही सरकार से जीएसटी कम करने की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
कुल मिलाकर, आने वाली जीएसटी काउंसिल की बैठक पर सभी की निगाहें टिकी हैं। यह बैठक न केवल सोने-चांदी, बल्कि कई और उत्पादों और सेवाओं की कीमतों पर भी असर डालेगी। अगर सरकार ग्राहकों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए जीएसटी कम करती है, तो इससे त्योहारों के दौरान बाजार में रौनक बढ़ सकती है, और साथ ही, सोने पर निवेश को भी बढ़ावा मिल सकता है।